दो रुपए के अखबार के आर्टिकल ने बदल दी यूपी के गोरखपुर की दो बहनों की किस्मत। [ EXCLUSIVE COBRA TEAM ]

    EXCLUSIVE ( COBRA TELEVISION) यूपी की  दो बहनों ने अपने पिता की सेवा करने और अपने घर को चलाने के लिए वह किया जो शायद किसी के लिए भी आसान नहीं होगा अपनी पहचान छुपाकर 4 साल तक गांव वालों के ताने सुनकर भी पीछे नहीं हटने वाली इन बहनों को कोबरा टेलीविजन का सलाम।                       भारत में  एक प्रथा सदियों से चली आ रही है और वह प्रथा है बच्चे के रुप में लड़का चाहने वालों की आशीर्वाद भी दिया जाता है दूधो नहाओ पूतो फलो दूध में नहाओ और लड़का पैदा करो भारत जहां आशीर्वाद भी सेक्सिस्ट होता है वहां कई बार लड़कियों को कोख में ही मार दिया जाता है उन्हें पैदा कर भी दिया जाए तो छोड़ देते हैं कचरे के डिब्बे में ,नदी नाले में ,सड़क पर आखिरकार लड़कियों को मन मारकर जीना पड़ता है ।डर कर जीना पड़ता है ऐसा ही कुछ हुआ 18 साल की ज्योति कुमारी और 16 साल की नेहा के साथ जिन्हें सिर्फ काम करने के लिए 4 सालों तक अपनी पहचान छुपाने पड़ी ।उत्तर प्रदेश में गोरखपुर के पास एक छोटे से गांव बनवारी टोला की एक कहानी है ।इस कहानी की हीरो है यह दो लड़कियां ।2014 में ज्योति और नेहा के पिता बहुत बीमार पड़ गए थे ।इतने बीमार कि वह अपनी दुकान में कुछ कर नहीं सकते थे ।दोनों के पिता ध्रुव नारायण नाई थे और गांव में उनकी एक छोटी सी दुकान थी ।क्योंकि यह दुकान ही थी जिससे ध्रुव का घर चलता था ।इसलिए उनके बीमार पड़ने के बाद दुकान पर भी ताला लग गया। आर्थिक स्थिति खराब होते देख ज्योति और नेहा ने अपनी कमर कस ली और दुकान खोल ली लेकिन आखिर यह समाज दो लड़कियों को लड़कों का काम करने देता ।गांव वालों ने उनका जीना हराम कर दिया ।उन्हें ताने मारने लगे यहां तक कि उनकी दुकान पर आने वाले ग्राहक भी उन्हें इज्जत नहीं देते और उनके साथ बुरा बर्ताव करते ।इस सब से तंग आकर इन दोनों लड़कियों ने खुद को लड़के जैसा दिखाना शुरू कर दिया दोनों ने अपने नाम भी बदलकर दीपक और राजू रख लिए ।अपने बाल काट कर लड़को जैसे कर लिए पेंट शर्ट पहने लगी ।और लड़कों द्वारा पहने जाने वाला कड़ा भी पहने लगी ।उनके गांव के लोगों को तो उनकी पहचान पता थी करीब 100घर जानते थे कि वह दीपक और राजू नहीं बल्कि ज्योति और नेहा है ।आसपास के गांव वाले लोग यह नहीं जानते थे ज्योति और नेहा दोपहर में दुकान खोलते थी क्योंकि दिन में वह अपनी पढ़ाई पूरी करती थी ।वह रोजाना पढ़ाई करती थी ,दुकान पर काम करती ,पिता का ख्याल रखती और फिर घर के कामकाज में जुट जाती धीरे धीरे उनके हालत सुधरने लगे ।दोनों बहने दिन के ₹400 कमा लेती थी जो उनके घर के गुजारे के लिए पर्याप्त था ।दोनों बहनों ने 4 सालों में बेहद कठिन परिस्थितियां देखी उनके पिता का कहना है कि उन्हें यह देखकर बहुत दुख होता  उनकी बेटियों को यह सब झेलना पड़ रहा है ।लेकिन उन्हें गर्व है अपनी बेटियों पर। बेटियों ने बेहद मुश्किल भरे समय से बाहर निकाला है ज्योति और नेहा की जिंदगी ऐसे ही चल रही थी धीरे-धीरे उनके सभी कस्टमर यह जान रहे थे कि वह लड़कियां हैं और उन पर भरोसा करने लगे थे ।तभी गोरखपुर के एक जर्नलिस्ट ने उनकी कहानी एक अखबार में छापी और उसके बाद दोनों लड़कियों को सरकार ने सम्मानित किया ।सरकार के प्रोत्साहन के बाद यह कहा गया कि दोनों लड़कियों की मदद की जाएगी ताकि वह ब्यूटी पार्लर खोलने और अपना जीवन जिएं लेकिन ज्योति और नेहा ने मना कर दिया आखिर करें भी क्यों नहीं ब्यूटी पार्लर खोलने की सलाह उनकी 4 साल की तपस्या को मिट्टी में मिला देती। जब उन्होंने सैलून का काम किया है तो वह सैलून का काम ही करेंगी दोनों बहनों ने कहा कि अब उन्हें अपनी पहचान छुपाने की जरूरत नहीं है उन्हें बेहद अच्छा रिस्पांस मिल रहा है जब से उनकी खबर छपी है गांव वाले और आस पड़ोस के लोग उनकी तारीफ कर रहे हैं। यह कहानी समझाती है कि भारत में अब तक इस कदर भेदभाव लड़के और लड़कियों के बीच होता है कि उनके काम को भी उनके जेंडर के आधार पर आंका जाता है ।गांव की ज्यादातर महिलाएं या तो खेतों में काम करती हैं या फिर किसी सरकारी कारखाने में या फिर सिलाई ,कढ़ाई ,बुनाई का काम करती हैं या फिर कुछ खाना बनाती हैं और अपने घर का काम करती है पर क्या किसी को लगता है कि यह महिलाएं बेहद मेहनती हैं और दुनिया का कोई भी काम शायद इनके लिए मुश्किल नहीं है ।महिलाओं को पुरुषों से दूर काम करना चाहिए और उन्हें किसी भी स्थिति में लड़कों के काम में हाथ नहीं बटाना चाहिए लड़का होगा तो नाम रोशन करेगा वगैरा-वगैरा यह सब बातें हैं कि चाहे कुछ भी हो जाए भारतीय समाज में महिलाओं की हालत वैसे ही रहने वाली हैं पर ज्योति और नेहा जैसी लड़कियां इस भ्रांति को तोड़ती हैं।ज्योति और नेहा की कहानी कई लोगों को प्रेरित करेगी अपनी जिंदगी में लड़कियां बहुत आगे बढ़ सकती हैं ।क्या यह हो सकता हैं एक समाज में रहते हुए लड़का और लड़की बस कुछ वक्त के लिए अगर इंसान समझा जाए तो आगे चलकर देश को आगे बढ़ाने और अपने परिवार के जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए भी काम कर सकती हैं।

[गोरखपुर से राजबीर नरवाल की स्पेशल रिपोर्ट]

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