।। रण की बजाय दुविधा में फंसे भूपेन्द्र हुड्डा। स्पेशल रिपोर्ट:- राजबीर नरवाल /रोहतक।

 

 

 

NEWS DESK (COBRA TELEVISION) रोहतक । पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा ने परिवर्तन महारैली को लेकर आर पार का ऐलान किया था, लेकिन वह फुस निकला। अब हुडा पूरी तरह संकट में फंस गए हैं और उनके सामने ऐसी स्थिति बन गई है कि वे अब ना इधर के और ना उधर के रहे। कुर्सी के चक्कर में खुद का करियर दांव पर लगा दिया, अपने पूर्व सांसद बेटे की राजनीति पर भी संकट के बादल मंडरा दिए हैं।

परिवर्तन महारैली में आर- पार का ऐलान होने के 12 घंटे पहले ही भूपेंद्र हुड्डा के बुलंद हौसलों में दरार पड़ती हुई नजर आई और वे आर -पार के रण का इरादा छोड़कर याचना के फेर में फंस गए। हुड्डा के हाव-भाव अचानक बदल गए और उन्होंने परिवर्तन महारैली की तैयारियों की बजाय दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान के बड़े नेताओं के दरवाजों पर चक्कर लगाने आरंभ कर दिए। उन्होंने आर-पार के मरण की बजाय जीवन को महत्व देने का अभियान छेड़ दिया।
यानी हुड्डा ने कांग्रेस छोड़ने के ऐलान की बजाए समझौते की पेशकश कर दी। बीती देर रात तक भूपेंद्र हुड्डा पार्टी हाईकमान के साथ समझौते की तलाश में चक्कर काटते रहे जिसके कारण परिवर्तन महारैली में नई पार्टी के गठन पर संशय के बादल मंडराते हुए नजर आए।
भूपेंद्र हुड्डा के कार्यालय से जारी टूर प्रोग्राम के अनुसार उन्हें 17 अगस्त को शाम 5:00 बजे परिवर्तन महा रैली में शामिल होने के लिए दिल्ली से निकलना था और 6:30 बजे रोहतक पहुंचना था। लेकिन टूर प्रोग्राम पर कार्य करने की बजाय भूपेंद्र हुड्डा श्याम को कांग्रेस के अपने समर्थक नेताओं के पास जाकर उन्हें समझौते की मध्यस्थता करने की याचना करने में जुट गए।
प्रदेश में जनता इस बात की उम्मीद कर रही है कि भूपेंद्र हुड्डा कांग्रेस हाईकमान के सामने याचना करने की बजाय परिवर्तन महारैली ने आर-पार के रण का ऐलान करेंगे लेकिन भूपेंद्र हुड्डा ने बिल्कुल इसके विपरीत काम करते हुए याचना को अचानक प्राथमिकता दे दी और दिल्ली के गलियारों में मध्यस्थता करने वाले चेहरों के सामने फरियाद करते रहे।
देर रात तक उनकी फरियाद आधी अधूरी आगे बढ़ती नजर आई जिसके कारण परिवर्तन महारैली में नई पार्टी के गठन पर सवालिया निशान लगते हुए नजर आए।

रात 1:00 बजे तक चली दिल्ली की सियासी गतिविधियां यह इशारा कर गई है कि भूपेंद्र हुड्डा रण से डरकर याचना पर उतर आए हैं और किसी भी कीमत पर पार्टी हाईकमान के साथ सेटिंग करते हुए मरण की बजाय सियासी जीवन हासिल करने की फरियाद कर रहे हैं।

जब हुड्डा मुख्यमंत्री थे तब क्यों नहीं पूरी की घोषणाएं

महा परिवर्तन रैली में हुड्डा ने कई घोषणाएं की लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब वे हरियाणा के मुख्यमंत्री थे तो उन्होंने इन घोषणाओं को सिरे क्यों नहीं चढ़ाया। इन्हासमेन्ट की बात करें तो यह परेशानी कांग्रेस सरकार की देन है। वही फ्री सुविधाएं देने से हरियाणा के लोगों पर ही कर्ज और बढ़ेगा। बता दें कि लोकलुभावन घोषणाओं के चक्कर में पंजाब स्टेट की आर्थिक कमर टूट चुकी है। कहीं वैसी स्थिति हरियाणा की न बन जाये। हालांकि हरियाणा के लोग राजनीतिक रूप से काफी मैच्योर हैं और लोकलुभावन घोषणाओं के चक्कर मे पड़ते नजर नहीं आएंगे।

फिलहाल भाजपा का रथ रोकना मुश्किल

हालांकि भूपेंद्र हुड्डा ने नई पार्टी बनाने का कोई ऐलान नहीं किया लेकिन एक कमेटी बनाने की बात कही है जो कि आगे का स्वरूप तैयार करेगी। कुल मिलाकर लोगों की भीड़ जुटाकर भूपेंद्र हुड्डा आलाकमान पर दबाव की राजनीति ही खेल रहे हैं लेकिन नगर निगम चुनाव, जींद उपचुनाव और हरियाणा लोकसभा की सभी 10 सीटें जीतने वाली भारतीय जनता पार्टी के हौसले बुलंद हैं। सबसे बड़ा प्लस प्वाइंट यह है कि केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की मोदी सरकार है, ऐसे में यह फैक्टर बड़ा काम करेगा। दूसरा बड़ा फैक्टर, हरियाणा के मौजूदा मुख्यमंत्री मनोहर लाल का साफ चेहरा होना है। उधर इनलो दो फाड़ हो चुकी है और कांग्रेसी घर की लड़ाई में घिरी हुई है, इसलिए मौजूदा विधानसभा चुनाव में bjp बड़े बहुमत के साथ सत्ता में लौटती दिख रही है।

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