।। बीबीसी ने रचा कशमीर में झूठ का प्रोपगंडा। कोबरा टेलिवीजन की स्पेशल रिपोर्ट।राजबीर नरवाल।

बीबीसी: कश्मीर को लेकर तुम तो झूठे निकले

बीबीसी, वो संस्था जहाँ काम करना हम पत्रकारों के लिए सपने जैसा होता था.
फैक्ट, सच, बोल्डनेस का पर्याय मानते थे हम सब बीबीसी को.

इस लेख में हम बीबीसी के जम्मू कश्मीर पर फैलाए जा रहे झूठ और प्रोपेगैंडा से पर्दा उठाने वाले हैं।
इस लेख में बीबीसी द्वारा भारत सरकार पर उठाये जा रहे सवालों के जवाब में एक जिम्मेदार नागरिक और पत्रकार होने की हैसियत से हम बीबीसी की तथाकथित जिम्मेदार पत्रकारिता पर कुछ सवाल उठाने वाले हैं।

इस बीबीसी रिपोर्ट में फैक्ट नहीं प्रोपेगंडा है!

बीबीसी रिपोर्ट की फूटेज

बीबीसी ने 10 अगस्त को एक विडियो जारी किया था, उस विडियो का टाइटल था-
Tear gas at Kashmir rally India denies happened

कश्मीर रैली में आंसू गैस के गोले दागे गए, भारत ने किया इंकार।

इस वीडियो को लेकर बीबीसी ने ये दावा किया की ये वीडियो जम्मू कश्मीर के श्रीनगर का है, जिसमे कुछ प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले छोड़े जा रहे हैं.
इस वीडियो में प्रदर्शनकारियों की कुछ और भी क्लिप देखने को मिलती है.
इस वीडियो के अंत में एक मौलाना द्वारा ‘आजादी का मतलब क्या’ सरीखे नारे भी लगाये जाते हैं.

अब सबूत ले लीजिये

नीचे की तस्वीर को ज़रा गौर से देखिए

10 अगस्त को बीबीसी द्वारा जारी क्लिप्स में जो प्रदर्शनकारी दिखलाई दे रहे हैं उनके हाथों में एक झंडा भी दिखता है।
एक झंडा जिस पर पीले और हरे रंग का बैकग्राउंड है।
ध्यान से देखने पर सफ़ेद रंग की कुछ धारियां भी दिखाई देती हैं।
बीबीसी के झूठ की गवाही प्रदर्शनकारियों के हाथों का ये परचम ही दे रहा है।
क्योंकि ये झंडा ना तो जम्मू कश्मीर का है और ना ही जम्मू कश्मीर के किसी संगठन का।
बल्कि ये झंडा है पाकिस्तान अधिगृहित काश्मीर यानी POK का है।
इसके बाद ये समझना मुश्किल नहीं है कि बीबीसी ने अपनी रिपोर्ट्स में जो क्लिप्स दिखाएँ हैं और जिनको लेकर ये दावा किया है, कि ये क्लिप्स श्रीनगर की हैं।
हकीकत ये क्लिप्स POK में हुए प्रदर्शन की हैं।
उपर की तस्वीर में लाल रंग के बैकग्राउंड वाला जम्मू कश्मीर का झंडा भी आपको दिखाई दे रहा होगा । हमे ये झंडा बीबीसी की रिपोर्ट में किसी प्रदर्शनकारी के हाथ में देखने को नहीं मिला।
मजेदार बात तो ये भी है 10 अगस्त से लेकर अब तक बीबीसी ने कई क्लिप्स जारी किये हैं लेकिन हर क्लिप में POK का ही झंडा दिखलाई दे रहा है।

बीबीसी ने पहले भी जारी किया था ऑडियो

इससे पहले 6 अगस्त को बीबीसी ने अपने फेसबुक पेज पर एक ऑडियो क्लिप भी जारी किया था।इस ऑडियो क्लिप में बीबीसी संवाददाता ने जम्मू कश्मीर में ढाबा चलाने वाले एक शख्स से बात की थी।
ध्यान से इस ऑडियो को सुनने पर इसमें कई लूप होल्स दिखाई देते हैं।
मसलन संवाददाता पहले ढाबे वाले से उसका नाम पूछती हैं।जब वो नाम बताता है तब जिम्मेदार पत्रकारिता का परिचय देते हुए बीप की आवाज लगा दी जाती है।
लेकिन मोहतरमा खुद इसी ऑडियो के नौवें सेकंड में उस व्यक्ति से पूछ बैठती हैं, ‘ढाबा चलाते हैं क्या प्रकाश जी’.
3 मिनट 37 सेकंड की इस ऑडियो में बीबीसी संवाददाता कई बार प्रकाश के मुुँह में अपने शब्द डालने की कोशिश करती हैं पर प्रकाश कुछ ख़ास नहीं बोलते।
ऑडियो में प्रकाश बंद का जिक्र जरुर करते हैं पर साथ में ये भी बताते हैं उन्हें कोई ख़ास फर्क नहीं पड़ा है. प्रकाश ये भी कहते हैं की टीवी तो चल रहा है लेकिन उनके पास देखने का समय नहीं होता क्योंकि वो सुबह से देर रात तक अपने ढाबे पर रहते हैं।
2 मिनट 52 सेकंड पर प्रकाश ये भी बताते हैं की उनके कश्मीरी दोस्त अब उनके साथ ये मजाक करते हैं कि अब प्रकाश वहां जमीन खरीद सकते हैं।
कुल मिलाकर ये ऑडियो एक प्रोपेगंडा का हिस्सा ही प्रतीत होता है।
इस ऑडियो में कहीं से कहीं तक भारतीय सेना द्वारा किसी प्रकार की दमनकारी गतिविधि का जिक्र प्रकाश नहीं करते हैं।
हालाँकि, बीबीसी इस ऑडियो क्लिप की जबर्दस्त सोशल मीडिया पैकेजिंग कर रहा है।
साथ ही लोगों से इसे शेयर करने हेतु अपील भी कर रहा है।

बीबीसी के फेसबुक कमेन्ट

आप तो ऐसे ना थे।

बीबीसी का ट्रैक रिकॉर्ड अब तक एक अच्छी पत्रकारिता का रहा है, जहाँ बीबीसी के तथ्यों पर हम आँख मूंदकर भरोसा कर लेते थे।
लेकिन इन रिपोर्ट्स को देखने के बाद अब बस यही कह सकते हैं।

बीबीसी, आप तो ऐसे ना थे।

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